Lotus Temple Delhi's Growing Tourist Places History, Establishment, Structure, and Interesting Facts of the Temple.

लोटस टेम्पल दिल्ली का बढ़ता पर्यटक स्थल मंदिर का इतिहास, स्थापना,सरंचना,तथा रोचक तथ्य.....
Lotus Temple Delhi's Growing Tourist Places History, Establishment, Structure, and Interesting Facts of the Temple. 





कमल मंदिर का परिचय Introduction of lotus temple. 
भारत की राजधानी दिल्ली में घूमने के लिए वैसे तो कई जगह है जैसे लाल किला,इंडिया गेट,जमा मस्जिद,ताज महल,क़ुतुब मीनार,पर इनके इलवा लोटस टेम्पल सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है,जो दिल्ली के नेहरू प्लेस में स्तिथ है!यह मंदिर एक बहाई उपासना मंदिर है!जिसमे कोई मूर्ति पूजा अथवा पाठ कर्म नहीं  होता,जैसा की अन्य मंदिरों में देख ने को मिलता है!लोग यहाँ पर शांति का अनुभव करने आते हैं और आत्मिक सुख प्राप्त करते है!

कमल मंदिर की स्थापना Establishment of lotus temple. 
लोटस टेम्पल की स्थापना 24 दिसम्बर 1986 को किया गया,लोटस टेम्पल का 26 एकड़ में फैला हुआ है!कमल के सामान बानी इस मंदिर की आकृति इसे लोटस टेम्पल नाम प्रदान करती है,हिन्दू धर्म संस्कृति के अनुसार कमल (lotus) को पवित्र मन जाता है!इसे बहाई समाज ने बनवाया था,इसलिए इसे बहाई मदिर भी कहा जाता है!इसको 20 वी सदी का ताज महल भी कहा जाता है! 


कमल मंदिर की वास्तुकला architecture of lotus temple. 



मंदिर का वास्तु पर्शियन आर्किटेक्टर फारिबर्स साहबा (‎Fariborz Sahba) द्वारा तैयार किया गया था!जो एक  ईरानी थे,और कनाडा में रहते हैं! उन्हों ने इसका डिज़ाइन 1976 में तैयार करके काम शुरू करवाया था! दुनिया के वास्तुकला के नमूनों में से कमल मंदिर (लोटस टेम्पल) भी शामिल है!इसका निर्माण बहा उल्लाह ने करवाया था,जो बहाई धर्म के संस्थापक थे! परन्तु यहाँ किस एक धर्म की प्रभुता नहीं है,यहाँ सभी धर्मों के लोग आते है!लोटस टेम्पल को बनाने में लगभग एक करोड़ डॉलर की लगत आई थी! मंदिर आधे खिले कमल की आकृति में संगमरमर की 27 पंखड़ियों से बनाया गया है! जो की तीन चक्रों में व्यवस्तिथ हैं!इसके चारों और 9 दरवाजे हैं!  इसके बीचों बीच एक बड़ा हाल है ,जिसकी लम्बाई 40 मीटर है,हाल में करीब 2500 लोग एक साथ बैठ सकते है!कमल मंदिर किचड़ में खिले कमल की तरह परतीत होता है! भारत के लोगों के लिए कमल का फूल पवित्रता तथा शांति का प्रतीक होने के साथ ईश्वर के अवतार का संकेत चिह्न भी है। यह फूल किचड़ में खिलने के बावजूद पवित्र तथा स्वच्छ रहना सिखाता है, लोटस टेम्पल अपने चारों ओर से पानी के तालाबों से घिरा हुआ है!

बहाई धर्म Bahá'í Religion बहाई धर्म 19 सदी के ईरान में शुरू हुआ था,बहाई धर्म पूर्ण रूप से सवतंत्र है! यह किसी भी धर्म से जुड़ाव नहीं रखता,परन्तु यह सभी धर्मो को मान्यता प्रदान करता है,इनके अनुसार सभी धर्मो का मूल एक ही है! बहाई धर्म एकेश्वरवाद में व्श्वास रखता है! इस धर्म की स्थापना १८४४ बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह ने की थी,उनके अनुयाई उन्हें पूर्व धर्म के कृष्ण,ईसा,बुद्ध,तथा मूसा का अवतार मानते थे!
किताब ए अक़दस बहाई धर्म का मुख्य धर्म ग्रन्थ है! बहाई धर्म के अनुयाई विश्व के १८० देशों में अपने धर्म का प्रचार तथा नवनिरान का कार्य कर रहे हैं!

बहाई धर्म सिद्धांत इस प्रकार हैं 
  • ईश्वर एक है
  • सभी के लिये अनिवार्य शिक्षा
  • सभी के लिए न्याय
  • विश्व शान्ति एवं विश्व एकता
  • सभी धर्मों का स्रोत एक है

कैसे पहुंचे How to reach
लोटस टेम्पल पहुँचने के लिए आप मेट्रो से आ सकते हैं! नेहरू प्लेस से कालका जी मेट्रो स्टेशन पहुंचने के बाद ऑटो रिक्शा या पैदल भी 10 मिनट्स में पहुंच सकते हैं!


मंदिर में जाने का समय Time to visit the temple गर्मिओं में खुलने का समय 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है! और सर्दिओं के मौसम में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है!यहाँ कोई एंट्री फीस नहीं ली जाती है!

प्रार्थना का समय पहली प्रार्थना 10 बजे ,12 बजे ,3 बजे ,5 बजे समय अनुसार होती है, प्रतेक प्रार्थना 5 मिनट्स के लिए आयोजित की जाती है !

लोटस टेम्पल के  कुछ रोचक तथ्य 

  • भारतीय उपमहाद्वीप में इसे मदर टेम्पल के नाम से जाना जाता है!
  • लोटस टेम्पल को बहुत से अवार्डों से नवाजा गया है और 120 अख़बारों में प्रकाशित किया गया है,कईं पत्रिकाओं ने भी इसे प्रकाशित किया है!
  • यह मंदिर अपने चारों तरफ से पानी के 9 तालाबों से घिरा हुआ है!
  • यहाँ पर प्रतिदिन 8 से 10 हजार पर्यटक प्रतिदिन प्राथना सभा में हिस्सा लेने आते है!
  • बहाई धर्म बहुत सी सुविधाएँ भी प्रदान करता है,जो लोग इनके कार्यों में रुचि रखते हैं,वह इनमे भाग ले सकते हैं,इन सुविधाओं में बच्चों की क्लासिस ,जूनियर यूथ क्लासिस,डिवोशनल मीटिंग आदि शामिल हैं!
  • लोटस टेम्पल को बनाने में 10 साल का लम्बा समय लगा,इसको बनाने में सफ़ेद संगमरमर का प्रयोग किया गया है,इस पत्थर को ग्रीस से मंगवाया गया था!
  • मंदिर को बनाने में 700 इंजिनियर,तकनीशियन तथा कामगारों ने 10 साल की कड़ी मेहनत से इसे कमल रूप प्रदान किया था!
  • इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है की अन्य मंदिरों की तरह इसमें कोई मूर्ति नहीं है यह धर्म मूर्ति पूजा में नहीं अपितु ईश्वरीय उपस्तिथि में विशवास रखता है!
  • लोटस टेम्पल सोमवार को बंद रहता है!














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